कैसे बचाएं पानी”, इसके लिए इंजीनियर्स ने दिए सुझाव, मिशन अमृत संचय अभियान के तहत इंजीनियर्स की कार्यशाला संपन्न
कैसे बचाएं पानी”, इसके लिए इंजीनियर्स ने दिए सुझाव, मिशन अमृत संचय अभियान के तहत इंजीनियर्स की कार्यशाला संपन्न
खण्डवा। 17 दिसम्बर 2025, ‘‘मिशन अमृत संचय‘‘ अभियान के तहत कलेक्टर ऋषव गुप्ता के मार्गदर्शन में खण्डवा जिले में जल संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। जल संरक्षण सम्बंधी अनुभवों को साझा करने के लिए इंजीनियर्स की कार्यशाला बुधवार को किशोर कुमार सभागृह में आयोजित की गई है। कार्यशाला में कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि खण्डवा जिला जल संरक्षण के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बने, यह प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए इंजीनियर्स के समूह को अलग अलग थीम दी गईं थीं, जिस पर उन्होंने आज मंथन किया है। उन्होंने कहा कि आज की कार्यशाला से जल संरक्षण के क्षेत्र में जो भी उपयोगी सुझाव प्राप्त होंगे, उन्हें जिला प्रशासन लागू भी करेगा ताकि पानी की एक एक बूंद को बचाया जा सके।
इस अवसर पर जिला पंचायत के सीईओ डॉ. नागार्जुन बी.गौड़ा, अपर कलेक्टर श्रीमती सृष्टि देशमुख गौड़ा सहित जिले के विभिन्न विभागों में पदस्थ इंजीनियर्स मौजूद थे। कार्यशाला के दौरान लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, विद्युत वितरण कम्पनी, सड़क विकास निगम, नर्मदा घाटी विकास विभाग सहित अन्य सभी विभागों में पदस्थ इंजीनियर्स में से अलग अलग समूह बनाकर जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जाने वाले नवाचारों के सम्बंध में “समूह चर्चा” की गई। इंजीनियर्स के सामूहिक मंथन के बाद प्राप्त निष्कर्षों के सम्बंध में इंजीनियर्स के ग्रुप्स ने कलेक्टर श्री गुप्ता के समक्ष प्रजेन्टेशन दिया। इंजीनियर्स की “समूह चर्चा” में पानी बचाने के उपयोगी सुझाव प्राप्त हुए।
समूह चर्चा के बाद सामने आए बहुत ही उपयोगी सुझाव
कार्यशाला में समूह चर्चा के बाद जल संरक्षण के लिए बहुत ही उपयोगी सुझाव प्राप्त हुए। इंजीनियर्स ने इस दौरान बताया कि नल जल योजना के नलों में टोंटी लगाना अनिवार्य किया जाए, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित तालाबों का गहरीकरण कराकर उनकी गाद निकाली जाए, ताकि वर्षा का नया पानी उसमें जमा हो सके। इस दौरान इंजीनियर्स के समूह ने सुझाव दिया कि गांव व शहर में पुराने कुओं की साफ सफाई की जाए तथा नागरिकों को इन कुओं का उपयोग कचरा घर के रूप में ना करने दिया जाए, इस पर सख्ती से रोक लगाई जाए। इंजीनियर्स ने सुझाव दिए की घरों से बहने वाले व्यर्थ पानी का उपयोग घरों के आसपास किचन गार्डन में उपयोग किया जाए। कार वॉशिंग सेंटर में व्यर्थ बहाने वाले पानी का उपयोग भूजल स्तर को बढ़ाने में किया जाए। नगरीय निकायों के टैंकरों के ढक्कनों की डिजाइन में बदलाव कर टैंकर से व्यर्थ बहने वाले पानी के अपव्यय को रोका जाए। इस दौरान यह भी सुझाव प्राप्त हुआ कि ओवरहेड टंकियों में अलार्म सिस्टम लगाकर भी पानी के अपव्यय को रोका जाए। इंजीनियर्स ने सुझाव दिया कि पानी का अपव्यय करने वाले नागरिकों पर पंचायत एवं नगरीय निकायों द्वारा अर्थ दंड लगाया जाए तथा विद्युत मीटर की तरह पानी सप्लाई का मीटर भी घरों एवं व्यवसायिक संस्थानों में अनिवार्य रूप से लगाया जाए।
एमपी लाइव न्यूज़ डिजिटल के लिए खंडवा से भवानी प्रसाद की रिपोर्ट
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