हरदा में नशामुक्ति को लेकर ग्रामीणों की बैठक, अवैध शराब पर रोक और पुलिस पेट्रोलिंग की मांग

हरदा में नशामुक्ति को लेकर ग्रामीणों की बैठक, अवैध शराब पर रोक और पुलिस पेट्रोलिंग की मांग

धुलकोट। ग्राम हरदा में ग्राम समिति के तत्वावधान में रविवार को नशामुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्राम की महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं ने भाग लेकर गांव में बढ़ती नशे की समस्या और उसके दुष्परिणामों पर चर्चा की। ग्रामीणों ने कहा कि नशे के कारण कई परिवारों का माहौल खराब हो रहा है और आए दिन विवाद की स्थिति बन रही है।

बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से मांग उठाई कि ग्राम में अवैध शराब की बिक्री पूरी तरह बंद होनी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि कच्ची शराब हो या पक्की शराब, किसी भी प्रकार की अवैध शराब की बिक्री से गांव के माहौल पर विपरीत असर पड़ रहा है। नशे की उपलब्धता के कारण युवा वर्ग भी इसकी चपेट में आ सकता है, जिससे आने वाले समय में सामाजिक समस्याएं बढ़ने की आशंका है।

बैठक में महिलाओं ने नशे के कारण परिवारों में होने वाले विवादों और परेशानियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। ग्रामीणों ने बताया कि शराब के सेवन के बाद कई घरों में विवाद की स्थिति बनती है। इसका असर परिवार के अन्य सदस्यों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। नशे में होने वाले झगड़ों के कारण परिवारों में तनाव बढ़ता है और कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद गंभीर रूप ले लेते हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि नशे की आदत से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ता है। मेहनत से कमाई गई राशि का बड़ा हिस्सा नशे में खर्च होने से परिवार की जरूरतें प्रभावित होती हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक परेशानी खड़ी हो जाती है। लंबे समय तक नशे की आदत परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को कमजोर कर सकती है।

बैठक में ग्रामवासियों ने पुलिस प्रशासन से ग्राम में नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में दिन में कम से कम दो बार पुलिस पेट्रोलिंग की जाए, जिससे अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक लग सके। ग्रामीणों के अनुसार नियमित पुलिस गश्त होने से अवैध गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी और लोगों में भी सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।

महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि नशामुक्ति केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे समाज को मिलकर प्रयास करना होगा। परिवारों को भी बच्चों और युवाओं पर ध्यान देना होगा तथा उन्हें नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करना होगा। युवाओं को खेल, शिक्षा और रोजगार जैसी सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि अवैध शराब की बिक्री की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही गांव में समय-समय पर नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि लोगों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान की जानकारी मिल सके।

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने गांव को नशामुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने का संकल्प लिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जाती है और पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग होती है तो गांव के वातावरण में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

एमपी लाइव न्यूज़ डिजिटल के लिए धुलकोट से भारत चौहान की रिपोर्ट 

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